कक्षा 10 हिंदी - सूरदास के पद
कवि: महाकवि सूरदास (भ्रमरगीत से उद्धृत)
1. पदों का सार (Summary)
इन पदों में कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद गोपियों की विरह व्यथा का वर्णन है। कृष्ण ने स्वयं न आकर अपने मित्र उद्धव के माध्यम से संदेश भेजा था। उद्धव ने गोपियों को निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश दिया, जिसे गोपियाँ स्वीकार नहीं करतीं। वे उद्धव पर भंवरे (भ्रमर) के माध्यम से व्यंग्य करती हैं।
2. प्रमुख पदों की व्याख्या
पद 1: "ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी..."
गोपियाँ उद्धव पर व्यंग्य करते हुए कहती हैं कि वे बहुत भाग्यशाली हैं क्योंकि वे कृष्ण के प्रेम रूपी धागे में नहीं बंधे। वे उस कमल के पत्ते के समान हैं जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता।
पद 2: "मन की मन ही माँझ रही..."
गोपियाँ अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही हैं कि उनके मन की बातें मन में ही रह गईं। वे कृष्ण के आने की प्रतीक्षा कर रही थीं, लेकिन योग संदेश ने उनकी विरह की अग्नि को और बढ़ा दिया।
पद 3: "हमारे हरि हारिल की लकरी..."
गोपियाँ कहती हैं कि उनके लिए कृष्ण हारिल पक्षी की उस लकड़ी के समान हैं जिसे वह कभी नहीं छोड़ता। वे सोते-जागते, दिन-रात केवल 'कान्ह-कान्ह' जपती हैं।
पद 4: "हरि हैं राजनीति पढ़ि आए..."
गोपियों को लगता है कि कृष्ण अब राजनीतिज्ञ बन गए हैं। वे उद्धव के माध्यम से चालबाजी कर रहे हैं। वे राजा का धर्म याद दिलाती हैं कि राजा को कभी भी अपनी प्रजा को सताना नहीं चाहिए।
3. काव्य सौन्दर्य (Literary Elements)
- भाषा: सरस और मधुर ब्रजभाषा।
- शैली: व्यंग्यात्मक और गेय (गाए जाने योग्य)।
- रस: वियोग श्रृंगार रस।
- अलंकार: उपमा, रूपक और अनुप्रास का सुंदर प्रयोग।
4. महत्वपूर्ण प्रश्न
- गोपियों ने उद्धव को 'बड़भागी' क्यों कहा? (व्यंग्य में, क्योंकि वह प्रेम से अछूते हैं।)
- 'हारिल की लकरी' से क्या तात्पर्य है? (जैसे हारिल लकड़ी नहीं छोड़ता, वैसे गोपियाँ कृष्ण को नहीं छोड़ सकतीं।)
- कृष्ण में आए परिवर्तनों का वर्णन कीजिए। (वे राजनीतिज्ञ हो गए हैं, छल-कपट करने लगे हैं।)
टिप: उत्तर लिखते समय ब्रजभाषा के शब्दों का अर्थ स्पष्ट करें ताकि पूरे अंक मिलें! 🌸🙏
Student Feedback
"Literally saved my internal exams. The diagrams and cheat sheets included are so clear! High quality material."
"Best notes for JEE preparation. Concise, accurate, and exactly what I needed for last-minute revision."